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mahabharat 6.3.45: दुष्ट हाथी काँप रहे हैं, चिन्ता कर रहे हैं और भय के मारे मल-मूत्र त्याग रहे हैं। घोड़े अत्यन्त दुःखी हो रहे हैं और समस्त हाथीराज पसीने से तर-बतर हो रहे हैं ॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.3.45 
ध्यायन्त: प्रकिरन्तश्च व्याला वेपथुसंयुता:।
दीनास्तुरङ्गमा: सर्वे वारणा: सलिलाश्रया:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट हाथी काँप रहे हैं, चिन्ता कर रहे हैं और भय के मारे मल-मूत्र त्याग रहे हैं। घोड़े अत्यन्त दुःखी हो रहे हैं और समस्त हाथीराज पसीने से तर-बतर हो रहे हैं ॥ 45॥
 
The rogue elephants are trembling and worrying and are excreting urine and feces out of fear. The horses are becoming extremely miserable and all the elephant kings are sweating profusely. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)