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mahabharat 6.3.44: बहुत से पक्षी बार-बार जोर-जोर से 'पक्व-पक्व' ध्वनि करते हुए झण्डियों के आगे छिप जाते हैं। यह राजाओं के विनाश का संकेत है ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.3.44 
पक्वापक्वेति सुभृशं वावाश्यन्ते वयांसि च।
निलीयन्ते ध्वजाग्रेषु क्षयाय पृथिवीक्षिताम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
बहुत से पक्षी बार-बार जोर-जोर से 'पक्व-पक्व' ध्वनि करते हुए झण्डियों के आगे छिप जाते हैं। यह राजाओं के विनाश का संकेत है ॥ 44॥
 
Many birds repeatedly utter the sound 'pakva-pakva' loudly and hide in the front of the flags. This sign indicates the destruction of kings. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)