Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.3.40-41: ब्राह्मणों द्वारा हवन करने के बाद प्रज्वलित अग्नि काले, लाल और पीले रंग की दिखाई देती है। उसकी लपटें घड़ी की विपरीत दिशा में उठती रहती हैं। उसमें से दुर्गन्ध निकलती रहती है और भयंकर ध्वनि होती रहती है। हे राजन! स्पर्श, गंध और रसना - इन सबकी स्थिति विपरीत हो गई है ॥40-41॥ | mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणों द्वारा हवन करने के बाद प्रज्वलित अग्नि काले, लाल और पीले रंग की दिखाई देती है। उसकी लपटें घड़ी की विपरीत दिशा में उठती रहती हैं। उसमें से दुर्गन्ध निकलती रहती है और भयंकर ध्वनि होती रहती है। हे राजन! स्पर्श, गंध और रसना - इन सबकी स्थिति विपरीत हो गई है ॥40-41॥
The fire lit after the Brahmins offered sacrifices appears black, red and yellow in colour. Its flames are rising in a counter-clockwise direction. A foul smell emanates from it and it keeps making a horrifying sound. O King! Touch, smell and taste – the state of all these has become opposite. ॥ 40-41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥