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mahabharat 6.3.36: जब सब ओर अंधकार छा गया था, तब महर्षिगण अपने-अपने घरों से निकलकर बड़ी-बड़ी जलती हुई मशालें लेकर एक-दूसरे के पास आए और इस प्रकार इन विपत्तियों के विषय में अपने-अपने विचार प्रकट करने लगे ॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.3.36 
विनि:सृत्य महोल्काभिस्तिमिरं सर्वतोदिशम्।
अन्योन्यमुपतिष्ठद्भिस्तत्र चोक्तं महर्षिभि:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जब सब ओर अंधकार छा गया था, तब महर्षिगण अपने-अपने घरों से निकलकर बड़ी-बड़ी जलती हुई मशालें लेकर एक-दूसरे के पास आए और इस प्रकार इन विपत्तियों के विषय में अपने-अपने विचार प्रकट करने लगे ॥ 36॥
 
As darkness had prevailed in all directions, the great sages, having left their homes with large lighted torches, came to each other and expressed their views regarding these calamities in the following manner. ॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)