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mahabharat 6.3.34: बड़ी नदियों का पानी खून की तरह लाल हो गया है और उनकी धाराएँ अपने उद्गम की विपरीत दिशा में बहने लगी हैं। कुओं से झाग उठ रहा है मानो बैल कूद रहे हों।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.3.34 
प्रतिस्रोतो महानद्य: सरित: शोणितोदका:।
फेनायमाना: कूपाश्च कूर्दन्ति वृषभा इव॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
बड़ी नदियों का पानी खून की तरह लाल हो गया है और उनकी धाराएँ अपने उद्गम की विपरीत दिशा में बहने लगी हैं। कुओं से झाग उठ रहा है मानो बैल कूद रहे हों।
 
The waters of the big rivers have turned red like blood and their currents have started flowing in the opposite direction to their source. Foam is rising from the wells as if bulls are jumping.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)