Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.3.30: राजन! राहु (सर्वतोभद्र चक्रगतवेध के अनुसार चित्रा और स्वाति के मध्य स्थित होकर) अपने तीक्ष्ण (क्रूर) कर्मों के कारण कृत्तिका नक्षत्र को कष्ट दे रहा है। धूमकेतु का आश्रय लेकर बार-बार भयंकर तूफान उठ रहे हैं। 30॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.3.30 
कृत्तिकां पीडयंस्तीक्ष्णैर्नक्षत्रं पृथिवीपते।
अभीक्ष्णवाता वायन्ते धूमकेतुमवस्थिता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजन! राहु (सर्वतोभद्र चक्रगतवेध के अनुसार चित्रा और स्वाति के मध्य स्थित होकर) अपने तीक्ष्ण (क्रूर) कर्मों के कारण कृत्तिका नक्षत्र को कष्ट दे रहा है। धूमकेतु का आश्रय लेकर बार-बार भयंकर तूफान उठ रहे हैं। 30॥
 
Rajan! Rahu (according to Sarvtobhadra Chakragatvedha, being situated between Chitra and Swati) due to his sharp (cruel) actions is troubling Krittika Nakshatra. Again and again fierce storms arise taking shelter from the comet. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)