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mahabharat 6.3.29: चारों ओर धूल की वर्षा से सभी दिशाएँ वीरान हो गई हैं। विनाश का संकेत देने वाले भयंकर बादल रात्रि में रक्त की वर्षा कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.3.29 
अशोभिता दिश: सर्वा: पांसुवर्षै: समन्तत:।
उत्पातमेघा रौद्राश्च रात्रौ वर्षन्ति शोणितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर धूल की वर्षा से सभी दिशाएँ वीरान हो गई हैं। विनाश का संकेत देने वाले भयंकर बादल रात्रि में रक्त की वर्षा कर रहे हैं।
 
All directions have become unattractive due to the rain of dust all around. The dreadful clouds indicating havoc rain blood at night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)