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mahabharat 6.3.28: (इस पखवाड़े में तिथियों के क्षय के कारण) त्रयोदशी के दिन ही, बिना किसी पर्व के, राहु ने चन्द्रमा और सूर्य दोनों को ग्रस लिया है। अतः दोनों ग्रह ग्रहण की अवस्था में प्रजा का नाश करना चाहते हैं॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.3.28 
चन्द्रादित्यावुभौ ग्रस्तावेकाह्ना हि त्रयोदशीम्।
अपर्वणि ग्रहं यातौ प्रजासंक्षयमिच्छत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
(इस पखवाड़े में तिथियों के क्षय के कारण) त्रयोदशी के दिन ही, बिना किसी पर्व के, राहु ने चन्द्रमा और सूर्य दोनों को ग्रस लिया है। अतः दोनों ग्रह ग्रहण की अवस्था में प्रजा का नाश करना चाहते हैं॥ 28॥
 
(In this fortnight, due to the loss of dates) on the same day of Trayodashi, without any festival, Rahu has engulfed both the Moon and the Sun. Hence, both the planets, in the state of eclipse, want to destroy the people.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)