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mahabharat 6.3.25: रात्रि के समय एक आँख, एक पंख और एक पैर वाला एक पक्षी आकाश में घूमता है और क्रोधित होने पर भयंकर स्वर में बोलता है। उसकी आवाज ऐसी लगती है मानो वह रक्त वमन कर रहा हो॥25॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.3.25 
एकपक्षाक्षिचरण: शकुनि: खचरो निशि।
रौद्रं वदति संरब्ध: शोणितं छर्दयन्निव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
रात्रि के समय एक आँख, एक पंख और एक पैर वाला एक पक्षी आकाश में घूमता है और क्रोधित होने पर भयंकर स्वर में बोलता है। उसकी आवाज ऐसी लगती है मानो वह रक्त वमन कर रहा हो॥25॥
 
At night a bird with one eye, one wing and one leg roams the sky and speaks in a terrifying voice when it is angry. Its voice sounds as if it is vomiting blood.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)