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mahabharat 6.3.21: योद्धाओं के धनुषों से ज्वालाएँ निकलने लगी हैं और तलवारें धधकती हुई आग से दहक रही हैं, मानो समस्त अस्त्र-शस्त्रों को स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि युद्ध आ पहुँचा है ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.3.21 
निश्चेरुरर्चिषश्चापात् खड्गाश्च ज्वलिता भृशम्।
व्यक्तं पश्यन्ति शस्त्राणि संग्रामं समुपस्थितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
योद्धाओं के धनुषों से ज्वालाएँ निकलने लगी हैं और तलवारें धधकती हुई आग से दहक रही हैं, मानो समस्त अस्त्र-शस्त्रों को स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि युद्ध आ पहुँचा है ॥ 21॥
 
Flames have begun to emanate from the warriors' bows, and swords have blazed with blazing fire, as if all the weapons can clearly see that a battle has arrived. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)