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mahabharat 6.3.18: अग्नि के समान तेजस्वी मंगल ग्रह (जिसकी स्थिति मघा नक्षत्र में बताई गई है) बार-बार परिक्रमा करता हुआ ब्रह्मराशि (बृहस्पति से युक्त नक्षत्र) में स्थित है और श्रवण को पूर्णतः आवृत करता है। 18॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.3.18 
वक्रानुवक्रं कृत्वा च श्रवणं पावकप्रभ:।
ब्रह्मराशिं समावृत्य लोहिताङ्गो व्यवस्थित:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अग्नि के समान तेजस्वी मंगल ग्रह (जिसकी स्थिति मघा नक्षत्र में बताई गई है) बार-बार परिक्रमा करता हुआ ब्रह्मराशि (बृहस्पति से युक्त नक्षत्र) में स्थित है और श्रवण को पूर्णतः आवृत करता है। 18॥
 
The planet Mars, which is as bright as fire (whose position is mentioned in the Magha Nakshatra), rotates repeatedly and is situated in Brahmarashi (the constellation containing Jupiter), completely covering Shravan. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)