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mahabharat 6.3.16: केतु नामक उपग्रह धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान प्रज्वलित है और वह इन्द्रदेव से संबंधित तेजस्वी ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 6.3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 3: व्यासजीके द्वारा अमंगलसूचक उत्पातों तथा विजयसूचक लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.3.16 
श्वेतो ग्रह: प्रज्वलित: सधूम इव पावक:।
ऐन्द्रं तेजस्वि नक्षत्रं ज्येष्ठामाक्रम्य तिष्ठति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
केतु नामक उपग्रह धुएँ से भरी हुई अग्नि के समान प्रज्वलित है और वह इन्द्रदेव से संबंधित तेजस्वी ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित है॥16॥
 
The satellite named Ketu is blazing like a smoke-filled fire and is situated in the brilliant Jyeshtha nakshatra associated with the god Indra.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)