Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.29.7: जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन श्रद्धापूर्वक करता है, जो शुद्धात्मा है और जो अपने मन और इंद्रियों को वश में रखता है, वह सभी का प्रिय होता है और सभी उससे प्रेम करते हैं। ऐसा व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भी कभी बद्ध नहीं होता। | mahabharat अध्याय 6.29: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रिय: ।
सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥ ७ ॥
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन श्रद्धापूर्वक करता है, जो शुद्धात्मा है और जो अपने मन और इंद्रियों को वश में रखता है, वह सभी का प्रिय होता है और सभी उससे प्रेम करते हैं। ऐसा व्यक्ति अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भी कभी बद्ध नहीं होता।
He who performs his duties with devotion, who is a pure soul and who controls his mind and senses, is loved by all and everyone loves him. Such a person is never bound even while performing his duties.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥