Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.29.5: जो जानता है कि विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) द्वारा प्राप्त होने वाली स्थिति भक्ति द्वारा भी प्राप्त की जा सकती है, और जो इस प्रकार सांख्य योग और भक्ति योग को एक ही रूप में देखता है, वह वस्तुओं को उनके वास्तविक रूप में देखता है। | mahabharat अध्याय 6.29: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यत्सांख्यै: प्राप्यते स्थानं तद्योगैरपि गम्यते ।
एकं सांख्यं च योगं च य: पश्यति स पश्यति ॥ ५ ॥
अनुवाद
जो जानता है कि विश्लेषणात्मक अध्ययन (सांख्य) द्वारा प्राप्त होने वाली स्थिति भक्ति द्वारा भी प्राप्त की जा सकती है, और जो इस प्रकार सांख्य योग और भक्ति योग को एक ही रूप में देखता है, वह वस्तुओं को उनके वास्तविक रूप में देखता है।
He who knows that the position attainable by analytical study (Sankhya) can also be attained by devotion, and who thus sees the Yoga of Sankhya and the Yoga of Bhakti as one and the same, sees things as they are.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥