ज्ञेय: स नित्यसन्न्यासी यो न द्वेष्टि न काङ्क्षति ।
निर्द्वन्द्वो हि महाबाहो सुखं बन्धात्प्रमुच्यते ॥ ३ ॥
अनुवाद
जो पुरुष न तो कर्मफल से द्वेष करता है और न ही कर्मफल की इच्छा करता है, वही स्थायी त्यागी कहलाता है। हे महाबाहु अर्जुन! ऐसा पुरुष समस्त द्वन्द्वों से मुक्त होकर जीवन-बन्धन को पार कर पूर्णतः मुक्त हो जाता है।
A man who neither hates the results of his actions nor desires the results of his actions is known as a permanent renunciant. Oh mighty-armed Arjuna! Such a man becomes free from all conflicts and crosses the bondage of life and becomes completely liberated.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥