योऽन्त:सुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव य: ।
स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥ २४ ॥
अनुवाद
जो अपने अन्तःकरण में सुख का अनुभव करता है, जो कर्मशील है और अपने अन्तःकरण का आनन्द लेता है तथा जिसका लक्ष्य अन्तर्मुखी है, वही सच्चा योगी है। वह परब्रह्म में मोक्ष पाता है और अन्ततः ब्रह्म को प्राप्त करता है।
He who experiences happiness in his inner self, who is diligent and enjoys his inner self and whose aim is inward is truly a perfect Yogi. He finds salvation in the Supreme Brahman and ultimately attains Brahman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥