श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 29: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 5: कर्मयोग  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.29.2 
श्रीभगवानुवाच
सन्न्यास: कर्मयोगश्च नि:श्रेयसकरावुभौ ।
तयोस्तु कर्मसन्न्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान ने उत्तर दिया - मोक्ष के लिए कर्म का त्याग और कर्मयोग दोनों ही उत्तम हैं। परन्तु इन दोनों में से कर्म के त्याग की अपेक्षा भक्तियोग श्रेष्ठ है।
 
Shri Bhagavan replied – For liberation, both renunciation of karma and devotional action (Karmayoga) are good. But of these two, devotional action is better than renunciation of action.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)