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इहैव तैर्जित: सर्गो येषां साम्ये स्थितं मन: ।
निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिता: ॥ १९ ॥
अनुवाद
जिनका मन एकता और समता में स्थित है, वे जन्म-मरण के बंधनों को जीत चुके हैं। वे ब्रह्म के समान निर्दोष हैं और सदैव ब्रह्म में स्थित रहते हैं।
Those whose minds are situated in unity and equality have already conquered the bondages of birth and death. They are as blameless as Brahman and always remain situated in Brahman.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥