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mahabharat 6.29.18: अपने सच्चे ज्ञान के कारण, एक विनम्र संत एक विद्वान और विनम्र ब्राह्मण, एक गाय, एक हाथी, एक कुत्ते और एक चांडाल को समान दृष्टि (समता) से देखता है।   |   mahabharat अध्याय 6.29: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 5: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 29: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 5: कर्मयोग  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.29.18 
विद्याविनयसम्पन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि ।
श‍ुनि चैव श्वपाके च पण्डिता: समदर्शिन: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
अपने सच्चे ज्ञान के कारण, एक विनम्र संत एक विद्वान और विनम्र ब्राह्मण, एक गाय, एक हाथी, एक कुत्ते और एक चांडाल को समान दृष्टि (समता) से देखता है।
 
Due to his true knowledge, a humble saint looks at a learned and humble Brahmin, a cow, an elephant, a dog and a Chandala with equal vision (equanimity).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)