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नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभु: ।
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तव: ॥ १५ ॥
अनुवाद
परमेश्वर न तो किसी के पाप स्वीकार करते हैं और न ही पुण्य। किन्तु सभी देहधारी प्राणी अपने सच्चे ज्ञान को ढकने वाले अज्ञान से मोहग्रस्त रहते हैं।
The Supreme Lord neither accepts anyone's sins nor their merits. But all embodied beings remain bewildered by the ignorance that veils their true knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥