Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.29.12: अविचल भक्त शुद्ध शांति प्राप्त करता है, क्योंकि वह अपने समस्त कर्मों को मुझे समर्पित कर देता है, किन्तु जो व्यक्ति भगवान से एकरूप नहीं है तथा अपने कर्मों का फल चाहता है, वह बद्ध है। | mahabharat अध्याय 6.29: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अविचल भक्त शुद्ध शांति प्राप्त करता है, क्योंकि वह अपने समस्त कर्मों को मुझे समर्पित कर देता है, किन्तु जो व्यक्ति भगवान से एकरूप नहीं है तथा अपने कर्मों का फल चाहता है, वह बद्ध है।
The unwavering devotee attains pure peace because he surrenders all his actions to Me, but a person who is not united with the Lord and desires the fruits of his labor is bound.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥