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mahabharat 6.29.1: अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण! पहले आप मुझे कर्मों का त्याग करने को कहते हैं और फिर भक्तिपूर्वक कर्म करने की आज्ञा देते हैं। अब आप कृपा करके मुझे निश्चयपूर्वक बताएँ कि इन दोनों में से कौन अधिक कल्याणकारी है?   |   mahabharat अध्याय 6.29: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 5: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 29: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 5: कर्मयोग  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.29.1 
अर्जुन उवाच
सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि ।
यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण! पहले आप मुझे कर्मों का त्याग करने को कहते हैं और फिर भक्तिपूर्वक कर्म करने की आज्ञा देते हैं। अब आप कृपा करके मुझे निश्चयपूर्वक बताएँ कि इन दोनों में से कौन अधिक कल्याणकारी है?
 
Arjuna said—O Krishna! First you ask me to renounce action and then you order me to perform action with devotion. Will you now kindly tell me with certainty which of these two is more beneficial?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)