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श्लोक  6.28.8 
परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थानार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
मैं भक्तों का उद्धार करने, दुष्टों का विनाश करने तथा धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए प्रत्येक युग में अवतरित होता हूँ।
 
I appear in every age to rescue the devotees, destroy the wicked and re-establish Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)