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mahabharat 6.28.42: अतः हे भारत! अज्ञान के कारण तुम्हारे हृदय में जो संशय उत्पन्न हुए हैं, उन्हें ज्ञानरूपी अस्त्र से नष्ट कर दो। हे भारत! उठो और योग के अनुसार युद्ध करो।   |   mahabharat अध्याय 6.28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.28.42 
तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
अतः हे भारत! अज्ञान के कारण तुम्हारे हृदय में जो संशय उत्पन्न हुए हैं, उन्हें ज्ञानरूपी अस्त्र से नष्ट कर दो। हे भारत! उठो और योग के अनुसार युद्ध करो।
 
Therefore, destroy the doubts that have arisen in your heart due to ignorance with the weapon of knowledge. O Bharata, stand up and fight in harmony with Yoga.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वणि श्रीमद्भगवद्‍गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादे ज्ञानकर्मसंन्यासयोगो नाम चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥ भीष्मपर्वणि तु अष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके श्रीमद्भगवद्‍गीतापर्वके अन्तर्गत ब्रह्मविद्या एवं योगशास्त्ररूप श्रीमद्भगवद्‍गीतोपनिषद्, श्रीकृष्णार्जुनसंवादमें ज्ञानकर्मसंन्यासयोग नामक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥ भीष्मपर्वमें अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)