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श्लोक  6.28.25 
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते ।
ब्रह्माग्न‍ावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
कुछ योगी विभिन्न प्रकार के यज्ञों के माध्यम से देवताओं की अच्छी तरह से पूजा करते हैं और कुछ परम सत्ता की अग्नि में आहुति देते हैं।
 
Some Yogis worship the gods thoroughly through various types of yagyas and some offer sacrifices in the fire of the Supreme Being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)