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mahabharat 6.28.17: कर्म की बारीकियों को समझना बहुत कठिन है। इसलिए व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से जानना चाहिए कि कर्म क्या है, विकर्म क्या है और अकर्म क्या है।   |   mahabharat अध्याय 6.28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.28.17 
कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः ।
अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
कर्म की बारीकियों को समझना बहुत कठिन है। इसलिए व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से जानना चाहिए कि कर्म क्या है, विकर्म क्या है और अकर्म क्या है।
 
It is very difficult to understand the nuances of karma. Therefore, a person should know clearly what karma is, what is vikarma and what is akarma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)