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mahabharat 6.28.14: मैं किसी भी कर्म से प्रभावित नहीं होता, न ही कर्म के फल की इच्छा रखता हूँ। जो मेरे बारे में इस सत्य को जानता है, वह भी कर्म के फल से नहीं बँधता।   |   mahabharat अध्याय 6.28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.28.14 
न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा ।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
मैं किसी भी कर्म से प्रभावित नहीं होता, न ही कर्म के फल की इच्छा रखता हूँ। जो मेरे बारे में इस सत्य को जानता है, वह भी कर्म के फल से नहीं बँधता।
 
I am not affected by any karma, nor do I desire the fruits of karma. One who knows this truth about me is also not bound by the fruits of karma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)