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mahabharat 6.28.12: इस संसार में लोग अपने स्वार्थी कार्यों में सफलता चाहते हैं, फलस्वरूप वे देवताओं की पूजा करते हैं। निस्संदेह, इस संसार में मनुष्यों को अपने स्वार्थी कार्यों का फल शीघ्र ही मिल जाता है।   |   mahabharat अध्याय 6.28: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 4: दिव्य ज्ञान   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.28.12 
काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवता ।
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में लोग अपने स्वार्थी कार्यों में सफलता चाहते हैं, फलस्वरूप वे देवताओं की पूजा करते हैं। निस्संदेह, इस संसार में मनुष्यों को अपने स्वार्थी कार्यों का फल शीघ्र ही मिल जाता है।
 
In this world, people want success in their selfish actions, as a result they worship the gods. Undoubtedly, in this world, humans get the fruits of their selfish actions very soon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)