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mahabharat 6.27.41: अतः हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन! तुम प्रारम्भ में ही इन्द्रियों को वश में कर लो, इस महान पापरूपी काम का दमन कर दो तथा इस ज्ञान और आत्मसाक्षात्कार के नाश करने वाले का वध कर दो।   |   mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.27.41 
तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ ।
पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
अतः हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन! तुम प्रारम्भ में ही इन्द्रियों को वश में कर लो, इस महान पापरूपी काम का दमन कर दो तथा इस ज्ञान और आत्मसाक्षात्कार के नाश करने वाले का वध कर दो।
 
Therefore, O Arjuna, best of the Bharatas, subdue the senses at the very outset and suppress this great symbol of sin (lust) and kill this destroyer of knowledge and self-realization.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)