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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.27.33 
सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि ।
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान व्यक्ति भी अपने स्वभाव के अनुसार ही कर्म करता है, क्योंकि सभी प्राणी त्रिगुणों से उत्पन्न अपने स्वभाव का ही पालन करते हैं। दमन से क्या प्राप्त होगा?
 
A wise man also acts according to his nature, because all beings follow their nature derived from the three Gunas. What can be achieved by suppression?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)