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ये त्वेतदभ्यसूयन्तो नानुतिष्ठन्ति मे मतम् ।
सर्वज्ञानविमूढांस्तान्विद्धि नष्टानचेतसः ॥ ३२ ॥
अनुवाद
किन्तु जो लोग ईर्ष्या के कारण इन निर्देशों की उपेक्षा करते हैं और उनका पालन नहीं करते, उन्हें समस्त ज्ञान से रहित, भ्रमित तथा सिद्धि प्राप्त करने के अपने प्रयासों में नष्ट हुआ समझना चाहिए।
But those who, out of jealousy, neglect these instructions and do not follow them should be considered devoid of all knowledge, misguided and ruined in their efforts to attain perfection.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥