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mahabharat 6.27.31: जो लोग मेरे आदेशानुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा इस आदेश का निष्ठापूर्वक तथा बिना किसी ईर्ष्या के पालन करते हैं, वे सकाम कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.27.31 
ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः ।
श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग मेरे आदेशानुसार अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा इस आदेश का निष्ठापूर्वक तथा बिना किसी ईर्ष्या के पालन करते हैं, वे सकाम कर्मों के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
 
Those who perform their duties as per my instructions and follow this instruction faithfully and without any jealousy, become free from the bondage of fruitive actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)