Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.27.3: श्री भगवान बोले, "हे निष्पाप अर्जुन! मैं तुम्हें पहले ही बता चुका हूँ कि दो प्रकार के लोग आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग इसे ज्ञानयोग के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं, जबकि अन्य लोग इसे भक्ति सेवा के माध्यम से करने का प्रयास करते हैं।" | mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीभगवानुवाच
लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मयानघ ।
ज्ञानयोगेन सांख्यानां कर्मयोगेन योगिनाम् ॥ ३ ॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले, "हे निष्पाप अर्जुन! मैं तुम्हें पहले ही बता चुका हूँ कि दो प्रकार के लोग आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। कुछ लोग इसे ज्ञानयोग के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं, जबकि अन्य लोग इसे भक्ति सेवा के माध्यम से करने का प्रयास करते हैं।"
Sri Bhagavan said, "O sinless Arjuna! I have already told you that there are two types of people who try to achieve self-realization. Some try to understand it through Jnanayoga, while others try to do it through devotional service."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥