Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.27.28: हे महाबाहो! जो भक्ति कर्म और स्वार्थ कर्म के बीच का अंतर अच्छी तरह से जानता है, वह परम सत्य का ज्ञाता है, वह कभी भी इंद्रियों और इंद्रिय-तृप्ति में अपने को शामिल नहीं करता। | mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः ।
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ॥ २८ ॥
अनुवाद
हे महाबाहो! जो भक्ति कर्म और स्वार्थ कर्म के बीच का अंतर अच्छी तरह से जानता है, वह परम सत्य का ज्ञाता है, वह कभी भी इंद्रियों और इंद्रिय-तृप्ति में अपने को शामिल नहीं करता।
O mighty-armed one, knowing well the difference between devotional action and selfish action, who is the knower of the Supreme Truth, never involves himself in the senses and sense-gratification.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥