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श्लोक  6.27.25 
सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत ।
कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्‍‍ग्रहम् ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार अज्ञानी लोग परिणामों की आसक्ति के साथ काम करते हैं, उसी प्रकार विद्वान लोगों को भी लोगों को सही मार्ग पर लाने के लिए बिना किसी आसक्ति के काम करना चाहिए।
 
Just as ignorant people work with attachment to the results, similarly learned people should work without any attachment to lead people to the right path.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)