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न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन ।
नानवाप्तमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ॥ २२ ॥
अनुवाद
हे पृथापुत्र! तीनों लोकों में मुझे कोई कार्य नहीं सौंपा गया है, न मुझे किसी वस्तु की कमी है, न मुझे किसी वस्तु की आवश्यकता है। फिर भी मैं अपने निर्धारित कार्य करने के लिए तत्पर रहता हूँ।
O son of Pritha! There is no work assigned to me in the three worlds, neither do I lack anything nor do I need anything. Still I remain ready to perform my assigned tasks.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥