Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.27.22: हे पृथापुत्र! तीनों लोकों में मुझे कोई कार्य नहीं सौंपा गया है, न मुझे किसी वस्तु की कमी है, न मुझे किसी वस्तु की आवश्यकता है। फिर भी मैं अपने निर्धारित कार्य करने के लिए तत्पर रहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.27.22 
न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किञ्चन ।
नानवाप्त‍मवाप्त‍व्यं वर्त एव च कर्मणि ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
हे पृथापुत्र! तीनों लोकों में मुझे कोई कार्य नहीं सौंपा गया है, न मुझे किसी वस्तु की कमी है, न मुझे किसी वस्तु की आवश्यकता है। फिर भी मैं अपने निर्धारित कार्य करने के लिए तत्पर रहता हूँ।
 
O son of Pritha! There is no work assigned to me in the three worlds, neither do I lack anything nor do I need anything. Still I remain ready to perform my assigned tasks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)