Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.27.16: हे अर्जुन! जो मनुष्य इस प्रकार वेदों द्वारा स्थापित यज्ञ-चक्र का पालन नहीं करता, वह निश्चय ही पापमय जीवन व्यतीत करता है। ऐसा मनुष्य केवल इन्द्रियों की तृप्ति के लिए ही व्यर्थ जीवन जीता है। | mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3: कर्मयोग । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः ।
अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ॥ १६ ॥
अनुवाद
हे अर्जुन! जो मनुष्य इस प्रकार वेदों द्वारा स्थापित यज्ञ-चक्र का पालन नहीं करता, वह निश्चय ही पापमय जीवन व्यतीत करता है। ऐसा मनुष्य केवल इन्द्रियों की तृप्ति के लिए ही व्यर्थ जीवन जीता है।
O dear Arjuna! One who does not follow the cycle of sacrifices established by the Vedas in this way in human life certainly leads a sinful life. Such a person lives in vain only for the satisfaction of the senses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥