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mahabharat 6.27.15: वेदों में नियमित कर्मों के नियम हैं और ये वेद परमपिता परमेश्वर (परब्रह्म) से प्रकट हुए हैं। फलस्वरूप, सर्वव्यापी ब्रह्म यज्ञ-अनुष्ठानों में सदैव विद्यमान रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.27: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 3: कर्मयोग   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.27.15 
कर्म ब्रह्मोद्भ‍वं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भ‍वम् ।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
वेदों में नियमित कर्मों के नियम हैं और ये वेद परमपिता परमेश्वर (परब्रह्म) से प्रकट हुए हैं। फलस्वरूप, सर्वव्यापी ब्रह्म यज्ञ-अनुष्ठानों में सदैव विद्यमान रहते हैं।
 
There are rules for regular actions in the Vedas and these Vedas have been revealed from the Supreme Lord (Parabrahma). As a result, the omnipresent Brahma is always present in the yagya rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)