Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.26.7: अब, अपनी कृपण दुर्बलता के कारण, मैं अपना कर्तव्य भूल गया हूँ और मेरा धैर्य जवाब दे गया है। ऐसी स्थिति में, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे निश्चित रूप से बताएँ कि मेरे लिए क्या सर्वोत्तम है। अब, मैं आपका शिष्य हूँ और आपकी शरण में हूँ। कृपया मुझे उपदेश दीजिए। | mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2: गीता का सार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अब, अपनी कृपण दुर्बलता के कारण, मैं अपना कर्तव्य भूल गया हूँ और मेरा धैर्य जवाब दे गया है। ऐसी स्थिति में, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे निश्चित रूप से बताएँ कि मेरे लिए क्या सर्वोत्तम है। अब, मैं आपका शिष्य हूँ और आपकी शरण में हूँ। कृपया मुझे उपदेश दीजिए।
Now, due to my miserly weakness, I have forgotten my duty and have lost all patience. In such a situation, I am asking you to tell me with certainty what is best for me. Now, I am your disciple and have surrendered to you. Please preach to me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥