श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.26.63 
क्रोधाद्भ‍वति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥ ६३ ॥
 
 
अनुवाद
क्रोध पूर्ण भ्रम को जन्म देता है और भ्रम स्मृति को भ्रमित कर देता है। स्मृति के भ्रमित होने पर बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि के नष्ट होने पर मनुष्य पुनः भव-कुण्ड में गिर जाता है।
 
Anger gives rise to complete delusion and delusion causes confusion of memory. When memory is confused, intelligence is destroyed and when intelligence is destroyed, man falls back into the well of existence.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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