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श्लोक  6.26.62 
ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते ।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥ ६२ ॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रिय विषयों के बारे में सोचते समय व्यक्ति के मन में उनके प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है, इस आसक्ति से काम उत्पन्न होता है और काम से क्रोध उत्पन्न होता है।
 
While thinking about sensual objects, a person develops attachment towards them, from this attachment lust is born, and from lust anger arises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)