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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2: गीता का सार
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श्लोक 61
श्लोक
6.26.61
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः ।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ ६१ ॥
अनुवाद
जो अपनी इन्द्रियों को पूर्णतया वश में कर लेता है और अपनी चेतना को मुझमें स्थिर कर लेता है, उसे स्थिर बुद्धि वाला पुरुष कहा जाता है।
He who controls his senses completely and fixes his consciousness on me is called a man of steady intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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