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श्लोक 6.26.61  |
तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः ।
वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता ॥ ६१ ॥ |
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| अनुवाद |
| जो अपनी इन्द्रियों को पूर्णतया वश में कर लेता है और अपनी चेतना को मुझमें स्थिर कर लेता है, उसे स्थिर बुद्धि वाला पुरुष कहा जाता है। |
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| He who controls his senses completely and fixes his consciousness on me is called a man of steady intellect. |
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