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mahabharat 6.26.60: हे अर्जुन! ये इन्द्रियाँ इतनी प्रबल और तीव्र हैं कि यदि कोई बुद्धिमान व्यक्ति इन्हें वश में करने का प्रयास करता है, तो ये उसके मन पर भी बलपूर्वक विजय प्राप्त कर लेती हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.26.60 
यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः ।
इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! ये इन्द्रियाँ इतनी प्रबल और तीव्र हैं कि यदि कोई बुद्धिमान व्यक्ति इन्हें वश में करने का प्रयास करता है, तो ये उसके मन पर भी बलपूर्वक विजय प्राप्त कर लेती हैं।
 
O Arjuna, the senses are so strong and rapid that they forcibly overpower the mind of even a prudent man who tries to control them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)