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mahabharat 6.26.6: हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए क्या बेहतर है—उन पर विजय पाना या उनसे पराजित होना। अगर हम धृतराष्ट्र के पुत्रों को मार डालें, तो हमें जीवित रहने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी वे युद्धभूमि में हमारे सामने खड़े हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  6.26.6 
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो
यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः ।
यानेव हत्वा न जिजीविषाम-
स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए क्या बेहतर है—उन पर विजय पाना या उनसे पराजित होना। अगर हम धृतराष्ट्र के पुत्रों को मार डालें, तो हमें जीवित रहने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी वे युद्धभूमि में हमारे सामने खड़े हैं।
 
We do not even know what is best for us—to conquer them or to be conquered by them. If we kill the sons of Dhritarashtra, we need not live. Yet they are standing before us on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)