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यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति ।
तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ॥ ५२ ॥
अनुवाद
जब आपकी बुद्धि आसक्ति के घने जंगल को पार कर जाएगी, तो आप जो कुछ भी सुनते हैं और जो कुछ भी सुनने योग्य है, उसके प्रति उदासीन हो जाएंगे।
When your intellect crosses the dense forest of attachment, you will become indifferent to everything that you hear and everything that is worth hearing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥