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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.26.50 
बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
भक्ति में लीन व्यक्ति इसी जीवन में अच्छे-बुरे कर्मों से मुक्त हो जाता है। इसलिए योग के लिए प्रयत्न करो, क्योंकि यही कर्म का सम्पूर्ण कौशल है।
 
A man engaged in devotion frees himself from good and bad deeds in this life itself. So strive for yoga because this is the whole skill of action.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)