Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.26.47: तुम्हें अपना कर्तव्य करने का अधिकार है, परन्तु तुम अपने कर्मों के फल के अधिकारी नहीं हो। तुम्हें न तो अपने आप को कर्मों के फल का कारण समझना चाहिए, न ही किसी कर्म को न करने में आसक्त होना चाहिए। | mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2: गीता का सार । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन ।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥ ४७ ॥
अनुवाद
तुम्हें अपना कर्तव्य करने का अधिकार है, परन्तु तुम अपने कर्मों के फल के अधिकारी नहीं हो। तुम्हें न तो अपने आप को कर्मों के फल का कारण समझना चाहिए, न ही किसी कर्म को न करने में आसक्त होना चाहिए।
You have the right to do your duty, but you are not entitled to the fruits of your actions. You should neither consider yourself the cause of the fruits of your actions, nor be attached to not doing any work.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥