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श्लोक 6.26.45  |
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन ।
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् ॥ ४५ ॥ |
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| अनुवाद |
| वेदों में मुख्यतः प्रकृति के तीन गुणों का वर्णन है। हे अर्जुन! इन तीनों गुणों से ऊपर उठो। सभी द्वैत और लाभ व सुरक्षा की सभी चिंताओं से मुक्त होकर आत्मनिर्भर बनो। |
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| The Vedas mainly describe the three gunas of nature. O Arjuna! Rise above these three gunas. Be free from all dualities and all worries of gain and security and become self-reliant. |
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