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mahabharat 6.26.42-43: अल्पज्ञ लोग वेदों के आलंकारिक शब्दों से बहुत आसक्त रहते हैं, जो स्वर्ग, उत्तम जन्म, शक्ति आदि की प्राप्ति के लिए विभिन्न सकाम कर्मों की सलाह देते हैं। वे इन्द्रिय-तृप्ति तथा विलासितापूर्ण जीवन की इच्छा रखते हुए कहते हैं कि इससे श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 6.26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 42-43
 
 
श्लोक  6.26.42-43 
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः ।
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ॥ ४२ ॥
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम् ।
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
अल्पज्ञ लोग वेदों के आलंकारिक शब्दों से बहुत आसक्त रहते हैं, जो स्वर्ग, उत्तम जन्म, शक्ति आदि की प्राप्ति के लिए विभिन्न सकाम कर्मों की सलाह देते हैं। वे इन्द्रिय-तृप्ति तथा विलासितापूर्ण जीवन की इच्छा रखते हुए कहते हैं कि इससे श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है।
 
Men of little knowledge are very attached to the figurative words of the Vedas which recommend various fruitive actions for attainment of heaven, good birth, power, etc. Desiring sense-gratification and a life of luxury, they say that there is nothing better than this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)