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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 26: श्रीमद्भगवद्‍गीता अध्याय 2: गीता का सार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.26.40 
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते ।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रयास में न तो हानि है और न ही हानि, अपितु इस मार्ग पर थोड़ी सी भी प्रगति महान भय से रक्षा कर सकती है।
 
There is neither loss nor loss in this effort but even a little progress on this path can protect one from great fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)